खाप इतिहास

KHAP PANCHAYATS : A SOCIO-HISTORICAL OVERVIEW

Written by Sh. Ajay Kumar : Khap has turned into a terrifying reality. On the very mention of the khap, the horrific faces of murdered couples in love and images of burnt Dalit houses immediately come to our mind. The conscious sections of the society have started to demand the restraining of these panchayats. In its characteristic response, the government have limited the entire issue to the confines of the […]

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खाप पंचायतों के फरमान बनाम संविधान

‘ढ़राणा-प्रकरण’, ‘वेदपाल-’हत्याकाण्ड’, ‘बलहम्बा-हत्याकाण्ड’, ‘सिवाना हत्याकाण्ड’ आदि एक के बाद एक कानून की धज्जियां उड़ाने वाली घटनाओं ने हरियाणा की खाप पंचायतों के विभत्स होते स्वरूप, स्वार्थपूर्ण राजनीतिकों की ‘वोटनीति’ और बेबस कानूनी सिपाहियों के बंधे हाथों ने 21वीं सदी के प्रबुद्ध समाज और 63वां स्वतंत्रता दिवस मनाने वाले विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश को गहन चिन्तन करने के लिए विवश कर दिया है। यह सब वर्जनाओं को तोड़ती आधुनिक […]

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आजाद भारत में सर्वखाप पंचायतें

आजाद भारत में 8, 9 मार्च 1950 में गाँव सोरम में सर्वखाप पंचायत का आयोजन पंडित जगदेव सिंह सिद्धान्ती मुख्याधिष्टाता गुरुकुल महा विद्यालय किरठल की प्रधानता में हुआ था. इसमें 60000 पंचों ने भाग लिया था. तत्पश्चात पूर्व न्यायाधीश श्री महावीर सिंह को हरियाणा सर्वखाप का प्रधान बनाया गया.  12 जून 1983 और 5 मार्च 1988 को स्वामी कर्मपाल जी की अध्यक्षता में दो बार हरियाणा सर्वखाप की पंचायतें हुईं जिनमें जाट जाति के उत्थान पर विचार कर समाज को दिशा […]

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अंग्रेजी राज और सर्वखाप पंचायतें

23 अप्रेल 1857 को मेरठ छावनी में सैनिक विद्रोह हुआ और 10 मई 1857 को सर्वखाप पंचायत के वीरों ने अंग्रेजों को गोली से उड़ा दिया. 11 मई 1957 को चौरासी खाप तोमर के चौधरी शाहमल गाँव बिजरोल(बागपत) के नेतृत्व में पंचायती सेना के 5000 मल्ल योद्धाओं ने दिल्ली पर आक्रमण किया. शामली के मोहर सिंह ने आस-पास के क्षेत्रों पर काबिज अंग्रेजों को ख़त्म कर दिया. सर्वखाप पंचायत ने चौधरी शाहमल और मोहर सिंह की सहायता के लिए जनता से अपील की. इस जन समर्थन […]

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भरतपुर जाट राज्य का उदय

सिकन्दरा की लूट के बाद राजा राम ही सर्वखाप पंचायत के सर्वे-सर्वा बन गए. 14 जुलाई 1688 को बीजल, अलवर, स्थान पर शेखावाटी राजपूतों और चौहान राजपूतों की लड़ाई में राजा राम शहीद हो गए. राजा राम की मृत्यु के बाद सर्वखाप पंचायत का सक्रीय मुख्यालय सिनसिनी गाँव बन गया. औरंगजेब ने राजपूतों को पक्ष में कर जाटों को दबाना शुरू किया. सन 1694 में शाह आलमगीर ने राजा बिशन सिंह राजपूत और कल्याण सिंह भदौरिया को आगरा के जाटों को दबाने भेजा. 20 फरवरी 1695 में जाटों […]

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खाप व्यवस्था क्या है ?

खाप या सर्वखाप एक सामाजिक प्रशासन की पद्धति है जो भारत के उत्तर पश्चिमी प्रदेशों यथा राजस्थान, हरयाणा, पंजाब एवं उत्तर प्रदेश में अति प्राचीन काल से प्रचलित है. इसके अनुरूप अन्य प्रचलित संस्थाएं हैं पाल, गण, गणसंघ, जनपद अथवा गणतंत्र. खाप पंचायतों का इतिहास बहुत पुराना है। ये पंचायतें पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, और राजस्थान के तमाम इलाकों में छठवीं-सातवीं शताब्दी ईसवी से प्रभाव में देखी जा सकती […]

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सर्व पाल खाप

सर्व पाल खाप में 22 गाँव हैं. यह फरीदाबाद, बल्लभगढ़ से लेकर मथुरा जिले के छाता, कोसी तक फैला एक विशाल संगठन है. इसमें करीब 1000 गाँव हैं. इस खाप में कोसी की डींडे पाल, बठैन की गठौना पाल, कामर की बेनीवाल पाल, होडल की सौरोत पाल, धत्तीर अल्लिका की मुंडेर पाल, जनौली की तेवतिया पाल, पैगांव की रावत पाल आदि सम्मिलित हैं. यह पाल दहेज़ निवारण में सबसे आगे […]

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सर्व गोत्रीय जाट खाप

सर्व गोत्रीय जाट खाप का मुख्यालय आगरा जनपद के बिचपुरी गाँव में है. इस खाप में जाटों के अनेक गोत्रीय गाँव सामिल हैं. गंधार गोत्र के बिचपुरी , जउपुरा, लड़ामदा , नौहवार गोत्र के सुनारी, पनवारी, सिरौली, नगला बसुआ , सोलंकी गोत्र के अंगूठी, मिढाकुर, सहाई, सकतपुरा, बडौदा, सहारा, आदि ८ गाँव, ढिल्लों गोत्र के दहतोरा, नरवार गोत्र के पथौली, भिलावती, कठमारी, छोंकर गोत्र के अटूस, मौहमदपुर, लखनपुर, घेन्घार गोत्र […]

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सर्वखाप

सर्वखाप में वे सभी खाप आती हैं जो अस्तित्व में हैं. समाज, देश और जाति पर महान संकट आने पर विभिन्न खापों के बुद्धिजीवी लोग सर्वखाप पंचायत का आव्हान करते हैं. निःसन्देश पाल और खाप में अंतर करना काफी कठिन है. साधारण शब्दों में कहा जा सकता है कि पाल छोटा संगठन है जबकि खाप में कई छोटी पालें सम्मिलित हो सकती हैं. खाप और पाल पर्याय वाची माने जाएँ […]

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सर्वखाप पंचायत

सर्वखाप पंचायत जाट जाति की सर्वोच्च पंचायत व्यवस्था है. इसमें सभी ज्ञात पाल, खाप भाग लेती हैं. जब जाति , समाज, राष्ट्र अथवा जातिगत संस्कारों, परम्पराओं का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है अथवा किसी समस्या का समाधान किसी अन्य संगठन द्वारा नहीं होता तब सर्वखाप पंचायत का आयोजन किया जाता है जिसके फैसलों का मानना और दिशा निर्देशानुसार कार्य करना जरुरी होता है. सर्वखाप व्यवस्था उतनी ही पुराणी है […]

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