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खाप के कोप का शिकार परिवार

रविन्द्र-शिल्पा और उनके परिवार की मुसीबत शुरु हो गई. ढराणा गांव मे कादियान गोत्र के लोग बहुमत में है और खाप पंचायत के नियम के हिसाब से शिल्पा इस गांव की बहू नही बन सकती थी. कादियान खाप ने पंचायत बुलाई औऱ फ़ैसला सुनाया कि अब इस परिवार के सामने दो विकल्प हैं पहला कि रविंद्र और शिल्पा की शादी तोड़ दी जाए और दूसरा ये ख़ानदान गांव छोड़ दे.

इस फ़रमान ने इस परिवार का जीना मुहाल कर दिया है. रविंद्र किसी कीमत पर शिल्पा को नही छोड़ना चाहता है. जब दोनों पर दबाव बढ़ा तो रविंद्र ने ज़हर खाकर जान देने की कोशिश की. इस परिवार की हालत पर किसी को भी तरस आ सकता है . इन बीते सालों के बाद आज रिसाल सिंह का परिवार अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. खाप पंचायत के राज सिंह कादयान कहते हैं कि जब रिसाल सिंह ने सात साल पहले सात परिवारों को गांव से निकालने का फ़रमान दिया था तो आज वो अपने पोते को कैसे एक ही गोत्र में शादी की अनुमति दे सकते हैं. रविंद्र ने पंचायत को वचन दिया है कि वो अपने पुश्तैनी गांव ढराणा में कभी क़दम नहीं रखेगा पर पंचायत अब भी अड़ी है कि रिसाल सिंह के परिवार को गांव छोड़ना ही होगा. रिसालसिंह की तीसरी पीढ़ी यानि रविंद्र कहते हैं कि इन पंचायतों को लोगों की ज़िदंगी के फ़ैसले करने का कोई हक़ नही है. वो कहते हैं ज़माना बदल चुका है. रविंद्र की पत्नी कहती है अगर उसे पता होता की उनकी शादी पर इतना बवाल होगा तो वो कभी ये शादी ना करती.

August 1, 2017 को प्रकाशित