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आजाद भारत में सर्वखाप पंचायतें

आजाद भारत में 8, 9 मार्च 1950 में गाँव सोरम में सर्वखाप पंचायत का आयोजन पंडित जगदेव सिंह सिद्धान्ती मुख्याधिष्टाता गुरुकुल महा विद्यालय किरठल की प्रधानता में हुआ था. इसमें 60000 पंचों ने भाग लिया था. तत्पश्चात पूर्व न्यायाधीश श्री महावीर सिंह को हरियाणा सर्वखाप का प्रधान बनाया गया. 

12 जून 1983 और 5 मार्च 1988 को स्वामी कर्मपाल जी की अध्यक्षता में दो बार हरियाणा सर्वखाप की पंचायतें हुईं जिनमें जाट जाति के उत्थान पर विचार कर समाज को दिशा निर्देश जरी किये गए.

आजादी के बाद पंचायती राज्य व्यवस्था लागू हो गई इससे सर्वखाप व्यवस्था का महत्त्व घट गया. अब वोट की राजनीति होने से जातियों ने अलग-अलग पंचायतें बनाली हैं. जातीय पंचायतों, गोत्रीय पंचायतों, पालों और खापों का महत्त्व बढ़ गया है. आजकल लोग न्यायालाओं में प्रकरणों का निराकरण चाहते हैं इसमें समय और धन दोनों की ही बर्बादी होती है और अनिश्चित लम्बे समय तक विवादों का निराकरण भी नहीं हो पाता है.

आज अखिल भारतीय जाट महासभा जाटों की सर्वोच्च संस्था है. इसके अधीन प्रदेशों में प्रादेशिक जाट महा सभाएं काम कर रही हैं.

August 1, 2017 को प्रकाशित