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हरियाणा में एक क्रांतिकारी परिवर्तन – अंतरजातीय विवाह को अनुमति प्रदान

एक नया इतिहास बनाते हुए हरियाणा के सबसे बड़ी खाप पंचायत ने शादी के बनाए नियमों में परिवर्तन करते हुए अंतरजातीय विवाह को हरी झंडी दिखाई है। हिसार के सतरोल खाप ने रविवार को अंतरजातीय विवाह को अनुमति प्रदान की, जिसके कारण राज्य व देशभर में कई खूनी घटनाओं को अंजाम दिया जा चुका है। परंपरा के नाम पर अंतरजातीय विवाह, अंतर-गांव विवाह (जिसके तहत 42 गांव आते हैं) व एक ही गोत्र में विवाह का खाप पंचायत हमेशा से ही विरोध करते रहे हैं। रविवार को हुई एक बैठक में सतरोल खाप ने 42 गांवों के परिवारों में विवाह करने व अंतरजातीय विवाह पर हामी भर दी। हालांकि, एक ही गांव व गांव की सीमा से सटे गांवों में शादी पर पहले की तरह ही प्रतिबंध लगा रहेगा। इसके साथ ही एक ही गोत्र में शादी करने पर लगा प्रतिबंध जारी रहेगा और केवल अभिभावकों की सहमति के बाद ही अंतरजातीय विवाह करने की इजाजत होगी। सतरोल खाप का यह फैसला वर्षों से चले आ रहे अंतरजातीय विवाह व अंतर-गांव विवाह का विरोध करने वाले खाप के आधुनिकीकरण की तरफ बढ़ाया गया पहला कदम माना जा सकता है। खापों के विरोध के कारण ग्रामीण इलाकों में जोड़ों के भागकर शादी करने, सुसाइड करने, ऑनर किलिंग व जाति विवाद सामने आते रहे हैं। इतना ही नहीं इसके कारण कई बार कुंवारों को अन्य राज्यों से दुल्हन लानी पड़ती हैं। पूर्व में अंतरजातीय व एक ही गोत्र में विवाह के कारण बड़ी संख्या में हत्याएं हुईं हैं। सतरोल पंचायत के अंतर्गत हिसार जिले के नारनौद गांव के 250 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 42 गांवों की 36 जातियां आती हैं। इनमें से जाटों की साठ फीसद जनसंख्या को अभिभावकों की सहमति के बाद विभिन्न जातियों में विवाह करने की अनुमति है। एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए सतरोल खाप के मुखिया इंदर सिंह सूबेदार ने बताया, ‘यह एकमात्र ऐसा रास्ता था जिससे हम अपनी परंपरा को जिंदा रख सकते हैं। राज्य से बाहर की दुल्हन लाने पर उसे यहां के माहौल से खुद को सामंजस्य बिठाने में समय लगता है, इसलिए हमने प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने का विचार किया। यह हरियाणा में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा।’

April 21, 2014 को प्रकाशित
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