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सतरोल खाप का सही समय पर सही फैसला : सांगवान

भिवानी। राष्ट्रीय दलित-पिछड़ा एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने एक विज्ञप्ति में बताया कि सतरोल खाप ने सही समय पर सही फैसला लिया है क्योंकि समय के साथ खापों को भी बदलाव करना आवश्यक है। इस सतरोल खाप के गांव किसी एक गौत्र के नहीं हैं, अलग-अलग गौत्रों के हैं, इसलिए रिश्ता करने में किसी प्रकार की कोई अड़चन नहीं है। लेकिन सैंकड़ों वर्षों से भाईचारे के नाम पर आपस में शादी-विवाह नहीं होते थे। अब तक तो भाईचारे की बात कही जा रही थी, लेकिन अब जब रिश्ते होंगे तो भाईचारा और मजबूत होगा। अभी खाप ने जो फैसला लिया है, वह बिल्कुल उचित है। गौत्र छोडक़र शादी-विवाह करने की प्रथा पूर्णतया वैज्ञानिक है, इसलिए जाट समाज में कम से कम दो गौत्र अपना और अपनी मां का छोडऩा अनिवार्य होना चाहिए और इसके अतिरिक्त अपने ही गांव में शादी करना भी ग्रामीण सभ्यता व परंपराओं के एकदम विपरीत है। जाट समाज में चार हजार से अधिक गौत्र हैं, इसलिए दो गौत्र छोडऩे में किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं आनी चाहिए।
सांगवान ने आगे बतलाया कि हम कई वर्षों से देख रहे हैं कि हरियाणा में अविवाहित लडक़े विशेषकर जाट समाज में बिहार और बंगाल के दूर-दराज के क्षेत्रों से दुल्हन खरीदकर ला रहे हैं, जिनकी जाति, धर्म, खानदान व चरित्र का किसी प्रकार का ज्ञान नहीं होता। ऐसी दुल्हनें कुछ दिन ठहरकर सारा माल समेटकर चंपत भी हो जाती हैं। इसलिए इन सभी बुराइयों से बचने के लिए आवश्यक हो गया है कि हरियाणा में अंतर्जातीय जातीय विवाह करना तर्कसंगत है। अब जहां तक संभव हो, जाटों को ऐसे रिश्ते दलित समाज में भी करने चाहिएं क्योंकि दलित समाज में जाट समाज की तुलना में लड़कियां ’यादा हैं, जिनके बारे में उनके खानदान आदि की जानकारी प्राप्त करना आसान है। इससे दलित और जाटों में आपसी भाईचारा मजबूत होगा और धीरे-धीरे जात-पात का भेद भी मिटता चला जाएगा।

April 21, 2014 को प्रकाशित
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