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खाप पंचायत : स्वगोत्र वैवाहिक विवाद

हरियाणा राज्य से खाप पंचायत के माध्यम से जो आवाज़ उठी है कि स्वगोत्र में उत्पन्न युवक तथा युवती आपस में बहन और भाई होते है | ये मामला बिनाकिसी आधार के इतना तूल पकड गया की कानून बनाने बाले तथा सरकार चलने बाले राजनेता चाहे वह कोई मंत्री या मुख्य मंत्री है सभी वोटो की राजनीति को लेकर धर्म के ठेकेदार जो आये दिन खाप पंचयत के माध्यम से नित नई बाते उठाते रहते है | सभी उनका पक्ष करने लगे है तथा नई कानून की मांग करने लगे है | इतना ही नहीं स्व गोत्र को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट को याचिका खारिज करनी पड़ी तथा यचिका करता के सामने ये कहा की वे कोर्ट का कीमती समय नष्ट ना करे अन्यथा आर्थिक दंड देना होगा |

मैंने अपने पिछले ब्लॉग में इस पर चर्चा करी थी तथा जनता से आग्रह भी किया था कि स्वगोत्र को लेकर चल रहे विवाद में किसी भी कानून कि आवश्यकता नहीं है |यद्यपि में किसी सिद्धांत को लेकर राजनीति नहीं करना चाहता हूँ | मेरा मत मात्र इतना है की उत्पन्न विवाद किसी समस्या का हल नहीं है और नहीं इस का दार्शनिक आधार है | ये समस्या ऐसी है जिस ने समय समय पर कई रूप लिए है तथा प्रवर्तित होती रही है | जिस ने समय समय पर अनेक रूप तो बदले लेकिन कोई स्थाई हल नहीं निकला एवं बिना दर्शन के सहारा लिए समाज के स्वार्थी तत्वों द्वारा इसे अनेक इसे रूप दिए जिस ने हिन्दू समाज को दल दल में फसा दिया | जहां समाज को दर्शन के माध्यम से किसी समस्या का संयोग से हल हो सक्ता था | समाज के धार्मिक नेतायो ने बिना विचार किये तथा दर्शन के बिना सयोग के इस के रूप बदल दिए गए इस में कोई अतिश्योक्ति नहीं है |

अतः मेरा कहना यह है कि खाप पंचयत का स्व गोत्र उत्पन्न विवाद दर्शन के युक्त नहीं है बहन तथा भाई के रिश्ते की अगर बात करे एक गोत्र ही क्या ? हर युवक और युवती आपस में बहन और भाई ही है | पत्नी का अधिकार विवाहिक सनस्कार के बाद किसी लड़की द्वारा किसी पुरुष को दिया जाता है जिस से वह पत्नी बनती है |

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