Border

आजाद भारत में सर्वखाप पंचायतें

आजाद भारत में , मार्च १९५० में गाँव सोरम में सर्वखाप पंचायत का आयोजन पंडित जगदेव सिंह सिद्धान्ती मुख्याधिष्टाता गुरुकुल महा विद्यालय किरठल की प्रधानता में हुआ था. इसमें ६०००० पंचों ने भाग लिया था. तत्पश्चात पूर्व न्यायाधीश श्री महावीर सिंह को हरियाणा सर्वखाप का प्रधान बनाया गया.

१२ जून १९८३ और मार्च १९८८ को स्वामी कर्मपाल जी की अध्यक्षता में दो बार हरियाणा सर्वखाप की पंचायतें हुईं जिनमें जाट जाति के उत्थान पर विचार कर समाज को दिशा निर्देश जरी किये गए.

आजादी के बाद पंचायती राज्य व्यवस्था लागू हो गई इससे सर्वखाप व्यवस्था का महत्त्व घट गया. अब वोट की राजनीति होने से जातियों ने अलग-अलग पंचायतें बनाली हैं. जातीय पंचायतों, गोत्रीय पंचायतों, पालों और खापों का महत्त्व बढ़ गया है. आजकल लोग न्यायालाओं में प्रकरणों का निराकरण चाहते हैं इसमें समय और धन दोनों की ही बर्बादी होती है और अनिश्चित लम्बे समय तक विवादों का निराकरण भी नहीं हो पाता है.

आज अखिल भारतीय जाट महासभा जाटों की सर्वोच्च संस्था है. इसके अधीन प्रदेशों में प्रादेशिक जाट महा सभाएं काम कर रही हैं.

Border